Achille Raymond

उद्योग के प्रधान

1914 - 1918

प्रथम विश्व युद्ध

प्रेस बटन सैन्य उपकरणों के साथ एक नए बाजार की तलाश की। अचिल्ले रेमंड छोटे ढांचों के लिए गोलियां और प्राइमर्स बनाने लगे। जुटाए गए लोगों को युद्ध में बुलाया गया और उनको महिला कर्मचारियों द्वारा बदल दिया गया जो इसे स्वीकार करते गए। लॉर्रच में संयंत्र जर्मन अधिकारियों द्वारा मांगी गई।

1919

कंपनी का अस्तित्व में रहना

दस्ताने का अंतरराष्ट्रीय बाजार इस छोटे युद्ध से उबर गया। अचिल्ले रेमंड छेद,  कीलक, घूमने वाली खिड़की के साथ उत्पादन में  विविधता लाये, लेकिन विलक्षण उत्पादों का भी उत्पादन  करते रहे जैसे कि फिक्स्ड पाइप, फिक्स्ड कालर, अंगुश्ताना…..

1925

विटेक्श संवरण की शुरुआत

निर्माण कंपनी ए रेमंड ने युद्ध पूर्व अपने स्तर को  प्राप्त किया। कठोर इस्पात के सबसे पहले यौगिकीकरण और विटेक्श ज़िप का उत्पादन शुरू, जिसका 40 वर्षों तक उत्पादन किया गया।

1925

मेरियस कोनिल

1925 से 1933 तक जर्मन कारखाने के निदेशक, और फिर फ्रांसीसी प्रतिष्ठान के बिक्री मैनेजर, ये 50 के दशक में मोटर वाहन बाजार  में  रूपांतरण के वास्तुकारों में से एक।

1933

जीन पेरोचत

उन्होंने लॉर्रच में मेरियस कोनिल की जगह ली और 1946 में, जर्मन कंपनी के पुनरुद्धार में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति साबित हुए। उन्होंने  1975 तक प्रतिष्ठान का नेतृत्व किया।

1935

एक कठोर इस्पात क्लिप का पहला पेटेंट

कार कार्यशालाओं में ढलाई के फिक्सिंग के लिए समर्पित किया।

1939 - 1945

द्वितीय विश्व युद्ध

1939 में, लॉर्रच फैक्टरी  "शत्रु संपत्ति" के रूप में जर्मन प्राधिकार के अधीन हो गयी । फ्रांस में, अचिल्ले ने लामबंदी का सामना किया। उनके पुत्र अल्बर्ट विक्टर, एक ब्रिटिश रेजिमेंट से संबंधित अधिकारी, एक शिविर से भागने में कामयाब हुए जहां  उनको कैद किया गया था। अचिल्ले रेमंड १९४१ में गुजर गए। अल्बर्ट विक्टर ने ग्रेनोबल की कंपनी की धुरा सँभाल ली । 

1941

Albert-Victor Raymond

योद्धा
एक प्रतिबद्ध व्यक्ति, जो अपने आदर्शों को छोड़े बिना व्यवसाय के वर्षों के दौरान कंपनी का मार्गदर्शन करते रहे। 50-60 साल की आर्थिक समृद्धि ने " रेमंड सदन" को एक सुगठित कंपनी बना दिया।